तो यह नंबर देखो ₹8,48,58 और यह सिर्फ एक वीडियो से आया जिसमें 4.2 मिलियन व्यूज हैं। और यह मेरी ही वीडियो है 2020 में बनाई थी। तब मैं नया था YouTube पे। मेरा चैनल छोटा था। सेटअप भी बहुत ज्यादा बेसिक था। लेकिन यह एक वीडियो ने मुझे ₹8 लाख से ज्यादा कमा के दिए हैं। लेकिन रुको यह डाटा 2020 का है और आज 2026 चल रहा है। 2020 का YouTube एक गली क्रिकेट के जैसा था और 2026 में YouTube जैसा है। हर मूव सोच समझ के लेना है और हर प्लेयर रिप्लेसेबल है। YouTube पे टाइम के साथ अब बहुत कुछ बदल चुका है और YouTube अर्निंग भी उसमें से एक चीज है जो सबसे ज्यादा बदली है। कल जो सेम व्यूज पे पैसा मिलता था आज वो अलग है। कितना अलग है वो मैं इस वीडियो में तुम्हें आगे दिखाऊंगा और मैं सिर्फ बोलूंगा नहीं अपनी एक्चुअल YouTube स्टूडियो खोल के तुम्हें सारे नंबर्स सारा डाटा सामने दिखाऊंगा। मैं 1000 व्यूज से लेकर 1 मिलियन व्यूज तक दोनों का डाटा दूंगा। आज इस वीडियो में तुम्हें दिखाऊंगा। और हां वीडियो के एंड में यह भी बताऊंगा कि क्या आज के टाइम पे YouTube से रियल इनकम निकालना पॉसिबल भी है या नहीं है। वो पार्ट वीडियो के लास्ट में आएगा। तो वीडियो एंड तक जरूर देखना। अर्निंग पे आने से पहले एक इंपॉर्टेंट चीज आरपीएम और सीपीएम ये चीज को क्लियर कर लेते हैं क्योंकि ये दोनों टर्म्स ऐसे हैं जो लोगों को अक्सर कंफ्यूज करते हैं और इन्हें समझे बिना आगे की चीजें तुम्हें प्रॉपर्ली समझ नहीं आएंगी। तो जब तुम YouTube पे वीडियो डालते हो और उस पे एड्स चलते हैं तो एडवरटाइजर YouTube को पैसा देता है। अब एडवरटाइजर YouTube को जो पैसा देता है उसे बोला जाता है सीपीएम। सीपीएम यानी कॉस्ट पर माइल। अब यह जो पैसा एडवरटाइजर ने दिया है वो सीधा YouTube तुम्हें नहीं देता। YouTube उसमें से अपना कट रखता है जो कि रफली 45% होता है और जो 55% बचता है वह तुम्हें मिलता है। यूबर को मिलता है। जो तुम्हें मिलता है उसे कहते हैं आरपीएम यानी रेवेन्यू पर माइल जो तुम्हारी एक्चुअल अर्निंग होती है 1000 व्यूज पे। इसे हम एक सिंपल एग्जांपल से समझते हैं। अगर तुम्हारा सीपीएम ₹100 है। मतलब एडवरटाइजर ने YouTube को ₹100 दिए हैं 1000 व्यूज के लिए। तो YouTube ने उसमें से ₹45 खुद रख लिए और बचा जो ₹55 वो तुम्हें दे दिया वो हुआ आरपीएम। इसलिए जब भी कोई पूछता है कि 1000 व्यूज पे कितना पैसा मिला? तो वह आरपीएम की बात कर रहा है। सीपीएम की बात नहीं कर रहा। सीपीएम हमेशा आरपीएम से ज्यादा होता है। अगर कोई तुम्हें सीपीएम सीपीएम का नंबर दिखा दे रहा है ये मेरी अर्निंग है तो वो झूठ बोल रहा है। वो पूरा सच नहीं है। तो अभी हमने YouTube का सिस्टम समझा कि पैसा कैसे आता है और एक्चुअल अर्निंग क्या होती है। और एक इंटरेस्टिंग बात यहां नोटिस करने वाली है कि जहां सिस्टम क्लियर होता है वहां डिसीजन लेना इजी हो जाता है। सेम चीज मुझे पहले इन्वेस्टमेंट के साथ भी फील होती थी। नाम तो सुना था। लोग बात भी करते पर एक्चुअली काम कैसे करती है यह क्लियर नहीं था। फिर जब मैंने इसके बारे में प्रॉपर्ली समझा तो मुझे रियलाइज हुआ लॉजिक काफी सिंपल है। मैं बात कर रहा हूं बॉन्ड्स की। अब तुम सोच रहे होंगे बॉन्ड्स क्या होता है? मान लो एक कंपनी को पैसे चाहिए तो वो बैंक से लेने के अलावा पब्लिक से भी ले सकती है। तो जब हम बॉन्ड खरीदते हैं तो हम उस कंपनी को पैसे उधार दे रहे हैं और कंपनी हमें रिटर्न में दो चीजें देती है। पहली चीज शेड्यूल्ड टाइमलाइंस के अकॉर्डिंग फिक्स्ड रिटर्न्स। और दूसरी चीज बॉन्ड की मैच्योरिटी खत्म होने पे तुम्हारा पूरा प्रिंसिपल अमाउंट वापस। अब प्रॉब्लम यह है कि इंडिया में रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए बॉन्ड तक एक्सेस पहले इतना इजी नहीं था। प्रोसेस कंफ्यूजिंग था। ऑप्शन समझ नहीं आते थे और टिकट साइज बहुत ज्यादा बड़ा था। इसलिए बिगिनर्स लोग इन्वेस्ट करने के लिए बहुत ज्यादा सोचते थे। लेकिन अब चीजें बदल गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने बॉन्ड को छोटे इन्वेस्टर्स के लिए बहुत ज्यादा एक्सेसिबल बना दिया है। और wिंटw्थ एक ऐसा ही प्लेटफार्म है जो लिस्टेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स को रिटेल इन्वेस्टर्स तक पहुंचाता है विद 9 टू 12% इंटरेस्ट पर एनम। विंटw्थ पे तुम बॉन्ड्स एक्सप्लोर कर सकते हो और 1000 से इन्वेस्टमेंट स्टार्ट कर सकते हो। इसमें पेमेंट ऑप्शंस भी बहुत सिंपल है। जैसे कि यूपीआई और नेट बैंकिंग। विंटw्थ पे एक डैशबोर्ड मिलता है जहां तुम अपनी इन्वेस्टमेंट्स और रीपेमेंट शेड्यूल ट्रैक कर सकते हो और सारे बॉन्ड्स एक्सचेंज पर लिस्टेड होते हैं। और एक औरेंट बात तुम अपने बॉन्ड्स कभी भी सेल कर सकते हो। क्योंकि यहां कोई लॉक इन पीरियड नहीं होता। बस उस केस में प्रिवेलिंग इंटरेस्ट रेट एप्लीकेबल होते हैं। और एक पॉइंट जो मुझे जेन्युइनली इंटरेस्टिंग लगा वो है विंटw्थ हर बॉन्ड लिस्टिंग में 2% इन्वेस्ट करता है। मतलब स्किन इन द गेम। अगर तुम बॉन्ड्स को और ज्यादा क्लियरली समझना चाहते हो विंट वेल्थ को एक्सप्लोर करना चाहते हो तो लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन में है। जाके डिटेल्स चेक करो। बाकी ऑफर रिलेटेड डॉक्यूमेंट्स जरूर पढ़ना। फिर अपना इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेना। अब ये चीज क्लियर हो गई और तुमने एक नया इनकम सोर्स भी समझ लिया। अब वापस आते हैं YouTube पे। क्योंकि अब तुम्हें दिखाने वाला हूं रियल डाटा। तो यह मेरी एक रीसेंट वीडियो है। हाउ टू मेक योर फर्स्ट YouTube वीडियो। मैंने यह अप्रैल 2026 में अपलोड की थी और इसमें अभी ₹1250 व्यूज हैं। जिसका एस्टेटेड रेवेन्यू बन रहा है ₹456.70 मतलब ₹40 ₹40.59 पर ₹1000 व्यूज का आरपीएम। तो कैलकुलेट करें तो ₹1,000 व्यूज पे रफ्ली 441 टू40 मिला है अपने को। पहली बार सुनके काफी लोग सोचेंगे कि यार इतना ही हां इतना ही है। और ऑनेस्टली बोलूं यह इंडिया के लिए एवरेज से थोड़ा बेटर ही है। इंडिया में एवरेज आरपीएम रफ्ली ₹30 से लेके ₹80 के बीच में होता है। डिपेंडिंग ऑन नीश एंड ऑडियंस। मेरे इस वीडियो का ₹40 ठीक है बुरा नहीं है। अब एक सिंपल कैलकुलेशन करते हैं जो तुम्हारे लिए बहुत ज्यादा यूज़फुल होगी। ₹1000 व्यूज पे अगर मुझे ₹40 मिल रहे हैं तो ₹1,000 व्यूज पे ₹400, ₹50,000 व्यूज पे ₹20,000 और ₹1 लाख व्यूज पे ₹4,000 तो ₹1 लाख व्यूज पे ₹4,000 के आसपास मुझे मिलेंगे। ज्यादा नहीं है, लेकिन यह सिर्फ इनकम का एक पैसिव सोर्स है। तब तक मेरे पे पैसे आते रहेंगे जब तक यह वीडियो लाइव रहेगी। लेकिन, यहां एक इंपॉर्टेंट चीज है। यह ₹40 का आरपीएम फिक्स नहीं है। हर वीडियो का अलग होगा। इसलिए मैं अभी तुम्हें 1 मिलियन वाली वीडियो का डाटा भी दिखाऊंगा और तुम यहां पर खुद ही सारा फर्क देख पाओगे। लेकिन वह फर्क देखने से पहले एक फर्क और अगर तुम YouTube पे ग्रो करना चाहते हो, ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना चाहते हो, अपनी लाइफ में फर्क लाना चाहते हो, तो इस चैनल को जरूर सब्सक्राइब कर दो। यहां मैं ऐसी ही YouTube से रिलेटेड वीडियोस तुम्हारे लिए हर हफ्ते लाता रहता हूं जो तुम्हारी ग्रोथ में फर्क लाएंगी। सब्सक्राइब। तो अब हम लोग यह डाटा देखते हैं। हाउ टू गेट वन सब्सक्राइबर्स इन सेवन डेज। ये वाली वीडियो है। ये मैंने अक्टूबर 2025 में अपलोड करी थी। और इसमें अभी करेंटली 1126784 व्यूज हैं। मतलब 11 लाख से थोड़ा ज्यादा व्यूज हैं। इसका एस्टेटेड रेवेन्यू अगर हम लोग देखें तो ₹71315 तो यहां पे मुझे रफ्ली 1 मिलियन व्यूज पे मिले ₹65,000। अब सोचो ये अमाउंट ज्यादा है या कम है। एक तरफ से देखो तो ₹65,000 सिर्फ ऐड से वो भी एक वीडियो से। बिना कुछ एक्स्ट्रा ज्यादा किए, बिना किसी को कॉल किए, बिना कोई किसी को सामान बेचे अच्छा खासा है। और यह एक टाइप की पैसिव इनकम है। आज भी यह वीडियो व्यू ला रही है, कल भी लाएगी और पैसा आज भी कमा रही है, कल भी कमाएगी। लेकिन ये दूसरी तरफ यह वाली वीडियो है जो जो 2020 वाले डाटा है, तब 4.2 मिलियन व्यूज आए थे मेरे और 4.2 मिलियन व्यूज पे मुझे 8.48 लाख मिले थे। मतलब इस टाइम पे आरपीएम था ₹200 ₹200 के आसपास और आज वही आरपीएम है ₹64 सेम चैनल है सेम यूट्यूबर है लेकिन आरपीएम में तीन गुना का फर्क है। ऐसा क्यों? जैसे मैंने पहले बोला था आरपीएम एक फिक्स नंबर नहीं है। वो तीन चीजों पे डिपेंड करता है। और जब ये तीन चीजें तुम्हें समझ आ जाए तो तुम्हारा YouTube को देखने का नजरिया बदल जाएगा। पहली चीज नीश। सोचो तुम्हारे शहर में एक जनरल डॉक्टर है और एक हार्ट स्पेशलिस्ट है। दोनों के दोनों डॉक्टर हैं। दोनों पेशेंट्स देखते हैं लेकिन स्पेशलिस्ट की फीस ज्यादा होती है क्योंकि उसकी वैल्यू अलग है। उसके पास आने वाले लोग ज्यादा सीरियस हैं। YouTube पे भी एग्जैक्टली यही होता है। फाइनेंस चैनल, टेक चैनल, बिजनेस चैनल इन पे एडवरटाइजर्स ज्यादा पैसा खर्च करते हैं। ज्यादा बड करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि ये ऑडियंस खर्चती है। ये ऑडियंस ज्यादा सीरियस है। वहीं जो एंटरटेनमेंट वाले चैनल होते हैं जो ब्लॉग हो गया या फिर कॉमेडी हो गया इन पे आरपीएम जनरली लो होता है। ऑडियंस सिर्फ फन के लिए देख रही है। इमीडिएटली कुछ खरीदने नहीं आई है। वो एडवरटाइजर्स के लिए ज्यादा सीरियस ऑडियंस नहीं है। तो मेरे 2020 वाले वीडियो का टॉपिक था YouTube प्रमोशन और Google एड्स। थोड़ा टेक वाला और थोड़ा बिजनेस वाला। इसलिए उस पे आरपीएम ज्यादा था। तो ये तो हो गई नीश की बात। सेकंड चीज आती है ऑडियंस लोकेशन। यह बहुत लोग इग्नोर करते हैं, लेकिन यह आरपीएम पे सबसे बड़ा इंपैक्ट डालती है। यूएस, यूके यहां की जो एडवरटाइजर्स होते हैं, वो इंडिया के एडवरटाइजर से ज्यादा पैसा खर्च करते हैं। ज्यादा बड करते हैं। मतलब अगर तुम्हारे चैनल पे यूएस से व्यूज आ रहे हैं। यूके से व्यूज आ रहे हैं तो आरपीएम ₹500 से भी ज्यादा हो सकता है। लेकिन इंडिया से व्यूज आ रहे हैं तो जनरली वही 30 से ₹80 के बीच रहता है। तो अगर तुम्हें आरपीएम बढ़ाना है तो एक तरीका है कि ऐसा कंटेंट बनाओ जो इंटरनेशनल ऑडियंस के लिए रेलेवेंट हो। या फिर इंग्लिश में बोलो या फिर इंग्लिश सबटाइटल्स ऐड करो एटलीस्ट। तीसरी चीज आती है सीजन और यह वाली चीज ज्यादातर यूटर्स को नहीं पता होती। YouTube आरपीएम पूरे साल एक जैसा नहीं रहता। अलग-अलग टाइम पे यह चेंज होता रहता है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच में आरपीएम सबसे ज्यादा रहता है। क्योंकि बड़ी-बड़ी कंपनीज़ अपने पूरे साल का बजट इस टाइम पे स्पेंड करती है। दिवाली सेल, क्रिसमस सेल, न्यू ईयर सेल कंपनीज़ एक दूसरे से आपस में कमपीट कर रही होती है। जिससे हमारा आरपीएम, हमारी कमाई ऊपर जाती है। और फिर जनवरी से फरवर के टाइम पे आरपीएम सबसे नीचे हो जाता है। क्योंकि कंपनीज़ यहां पे नया प्लान, नया अपना बजट प्लान कर रही होती है। नई स्ट्रेटजीज़ बना रही होती है और वो उस टाइम पे एड्स पे कम खर्चा करते हैं। तो हमारा आरपीएम वहां पे नेचुरली गिर जाता है। मतलब सेम चैनल, सेम वीडियो क्वालिटी, सेम व्यूज, दिसंबर में ₹69 का आरपीएम और फरवरी में ₹50 का आरपीएम। ये नॉर्मल है। अगर तुम्हारा जनवरी में आरपीएम गिर गया है तो घबराओ मत। ये YouTube की प्रॉब्लम नहीं है। ये सीजनल पैटर्न है। तो मेन पॉइंट ये है कि आरपीएम तीन चीजों पे डिपेंड करता है। नीश, ऑडियंस की लोकेशन और सीजन तीनों मिलके डिसाइड करते हैं कि तुम्हें ओवरऑल कितना पैसा मिलेगा? अब एक सवाल जो नेचुरली आता है तो क्या YouTube से पैसा बन सकता है या नहीं बन सकता? सच बोलूं? अभी तक 90% लोग यहां तक आके वीडियो स्किप कर देते हैं और फिर वही सवाल बार-बार अलग-अलग जगह पूछते रहते हैं, सर्च करते रहते हैं कि YouTube से पैसा बनता है या नहीं बनता है। और अगर तुम यहां तक देख रहे हो तो तुम उन 10% में से हो जो जिन्हें सच में इस सवाल का जवाब चाहिए हो तो सब्सक्राइब करो। अभी करो फिर जवाब बताता हूं। तो अगर मैं एक शब्द में बोलूं तो बन सकता है। लेकिन एक इंपॉर्टेंट बात सीधा बोलना चाहता हूं। जो लोग सिर्फ एड्स के भरोसे बैठे हैं वो आधा खेल खेल रहे हैं। एड्स एक ऐसा इनकम का सोर्स है जो कंसिस्टेंट होता है और पैसिव भी होता है। यानी सोते वक्त भी तुम उसमें से अर्निंग कर सकते हो। लेकिन सिर्फ एड्स पर डिपेंड करके कोई भी यूबर अमीर नहीं बनता। असली गेम, असली खेल तब स्टार्ट होता है जब तुम्हारी ऑडियंस बन जाती है। तब तुम पे स्पॉनसरशिप आने लगती है। बड़े ब्रांड्स तुम तक खुद पहुंचते हैं। एफिलिएट मार्केटिंग से तुम पैसा कमाने लगते हो। अगर तुम अपना प्रोडक्ट या अपना कोर्स ल्च करते हो तो वह भी बिकने लगता है और सच यह सारी चीजें मिलकर एड्स से कहीं ज्यादा कमाती हैं। लेकिन यह सारी चीजें तब होंगी जब पहला स्टेप लिया हो। पहली वीडियो बनाई हो। वो पहली वीडियो बनाना ही सबसे ज्यादा मुश्किल लगता है। लेकिन वही सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट है। इसलिए इस नेक्स्ट वीडियो पे क्लिक करो। हाउ टू मेक योर फर्स्ट YouTube वीडियो। इसमें मैंने एक्सजेक्टली बताया है पहली वीडियो कैसे बनाई जाती है। फिक्स रिटर्न डॉट नॉट नॉट नॉट नॉट नॉट नॉट कॉन्स्टिट्यूट गारंटी और अशो रिटर्न्स। इन्वेस्टमेंट्स कॉर्पोरेट डे सिक्योरिटी डे सिक्योरिटीज एंड सिक्योरिटाइज डे इंस्ट्रूमेंट सब्जेक्ट टू क्रेडिट रिस्क मार्केट रिस्क एंड डिफ़ॉल्ट रिस्क इंक्लूडिंग ले एंड डिफ़ॉल्ट इन पेमेंट